Caution on Advertisements

Attention Readers
Ongoing reading
The Reading Continues.
In the meantime, check the new books by the blogger at
Amazon Author Page and Google Playbooks of Sumir Sharma

My YouTube Channel:YouTube channel of Sumir Sharma



ANNOUNCEMENT of a Reader:
Response: Stars before the eyes

Friday, January 18, 2019

Methods to Publish a Hindi Book as an eBook on Kindle

मेरी  पुस्तक

"हिंदी में लिखी पुस्तक को स्वयं प्रकाशित करने की सुनहरी किताब"


हिंदी  में  लिखे  Manuscript को  eBook के  रूप  में  Amazon  पर  बेचने  की  विधि  पर है |  इस का  Thumbnail URL आगे  दिया  गया  है | 




सवि शर्मा और अमिश त्रिपाठी हाल के  ऐसे दो सफल और मक्बूल लेखक  हैं  जिन्होंने अपने लेखन का  प्रकाशन स्वयं प्रकाशन से शुरू किया|

Amazon पांच भारतीय भाषों में प्रकाशन करती है | Amazon हिंदी, गुजराती, मराठी, मलयालम और  तमिल में लिखी पुस्तकों का प्रकाशन KDP के माध्यम से करती है |

Amazon ने पहले  किताबों को ही  बेचने से अपना  व्यापर शुरू किया था | 2007 से Amazon ने Kindle नाम का E Reader और KDP शुरू किया था | Creative Space की साहयक Company से Amazon पेपरबैक भी छपता था  परन्तु  2018 में उस का काम KDP को दे दिया था | 

2015 में Amazon ने Kindle Create Software प्रस्तुत किया था |  2016 से Amazon ने भारतीय भाषों में भी मुद्रण शुरू कर दिया था | मुझे इस का पता 2017 में लगा और उसी साल मैंने Amazon पर अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित की थी | उस पुस्तक का शीर्षक है "एक कहानी कुछ कवितायें "| वह पुस्तक मूल रूप में एक experiment था | उसी समय से मैंने यह देखा की KDP पर मुद्रण के बहुत से पहलू हैं | उन सब पर जानकारी KDP की Website पर दे रखी है परन्तु वह छे यूरोपीय भाषों में है| अगर किसी पहलू पर अगर स्पष्टता लेनी हो तो KDP केवल यूरोपीय भाषों में ही पत्राचार करने को तैयार थी | 


मैंने यह भी देखा की कई लेखकों  ने Kindle पर मुद्रण की विधि पर अंग्रेज़ी में पुस्तकें छापी हुई हैं | परन्तु ऐसी  कोई पुस्तक  सामने नहीं आई जो हिंदी में मुद्रण करने वालों के लिए हिंदी में लिखी हो| यह तथ्य  2017 मेरे सामने था | मैंने ऐसी पुस्तक खुद लिखने की तैयारी कर ली | परन्तु ऐसा करते ही मैं इस मुश्किल में पड़ गया कि  ऐसी पुस्तक की रूपरेखा कैसी होगी | उस के लिए कैसा मंथन हुया उसे एक तरफ रखते हुए मैंने प्रतुत रूप में इस पुस्तक की रचना की है | 

पुस्तक  में 15 अध्याय और लेखक का  पत्र  है | 






No comments: