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Sunday, January 26, 2020

Open Secrets by Maloy Krishna Dhar

It took me a long time to close the reading of Open Secrets. The full name of the title is Open Secrets – the Explosive Memoirs of an Indian Intelligence Officer by M K Dhar.

The book contains thirty-three chapters and a long Prologue. It was the contents of the Prologue, which held me long. I developed an impression that the author was a self-righteous person who intends to guide the state on the methods of running an intelligence-gathering machinery and police administration. It made me learn something about the author from the book details, and I learned that it was written by an IPS officer who had worked for IB for a long duration. I do not know the civil services rules, but according to the writer, he was allotted West Bengal Cadre. He was earmarked during his training period for Intelligence work, and after spending some time as a police officer in West Bengal Districts, he moved to Delhi and got absorbed in IB. He was forcibly retired from the services during the tenure of Prime Minister Narsimha Rao for fumbling with the ISRO espionage case. Anyhow, I continued the reading. I had received this book free of cost for being a Prime Member scheme of Amazon. I earmarked it for reading on a Tab during my official duty where it provides a long duration of inactivity. That became the cause of taking too much time for reading this book.

Like the author, I have already talked too much about myself. However, I enjoy the freedom of saying whatsoever, and I want to say, as I am posting it on my blog.

Before I write further, I recommend the reading of this book.

The readers can look into the preview of the book given below.

The author had discussed such issues of Indian politics at the national and international level, which were new for me. I believe that it may be same for all such readers who believe in reading a quality material that can be entertaining and informative.

I learned about the East India separatist problems in detail for the first time. The author worked as an intelligence operator of India in Manipur and Nagaland. I can not authenticate all the information about the social and economic aspect of those regions, as everything was new to me. The author seems to have first-hand information about the tribes of East India. He knew about their culture, social structure and their mindset. Therefore, the reader who is interested in East India issues after the Independence of India, the book will be highly beneficial. The general public should also read the text to get the full definition of India.

The case of Sikkim was another addition to my knowledge after reading the book. The issues related to Punjab were quite refreshing, and I can authenticate the information provided in case of Punjab as I have lived through the tumultuous period of Punjab. Some of the information was new to me.

Similarly, the information on India and Pakistan relation, the relevance of Canada in the matter which is still an important issue was quite an addition to my understanding.

The author of the book had worked under the tenure of Jawahar Lal, Indira Gandhi, Rajiv Gandhi, Vishwanath Partap Singh and Narasimha Rao. He made many generalisations based on history and gave an incisive observation on the history of Modern India. No doubt, he was an IPS officer with good family and educational background. 

The author has adopted a literary style in writing each chapter. Every chapter begins with a quotation. Some of the episodes have a touch of a novelist. Somewhere one feels that he is writing as per the manual of the literary styles.

The author has tried to hide many truths. He was probably under a constraint to give only clues about some of the people who were in power. However, in the case of Buta Singh and Zail Singh, he is quite open in the later chapters. 

The author has tried to project himself as a man of high moral stands and refined virtues. He is open to reveal that he has a liking for and linkage with RSS. He has identified many RSS stalwarts about whom the present generation does not know. He claims to be an acquaintance of Dhirubhai Ambani and holds him and his family in high esteem. An intelligence operator has taken sides and became judgemental. I do not know how a more mature reader and knowledgeable people would evaluate it. The author had tried to convey that he had written this book to start a debate in the country. I have my views and a new reader of this book have his views.

The author has written another book with the same opening title but the subtitle of that book is India’s Intelligence Unveiled. Apart from that, there are some more titles to his name. Probably, they are being made available by his Mainak Dhar.

Mainak Dhar, another writer, who is the son of the author and found mention in the book, is also an author. His books are also available on Amazon and from Booksellers.

A Preview of a book by Mainak Dhar

Saturday, January 4, 2020

क्या स्वयं-प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? (भाग 1)

क्या स्वयं-प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? यह प्रश्न केवल भारत में ही नहीं पुछा जाता है बल्कि पश्चिमी देशों में भी उतनी ही तीव्रता से उठाया जाता है|

मेरा विचार है कि  स्वयं-प्रकाशन पश्चिमी देशों में ज्यादा प्रचलित है| ऐसा नहीं कि भारत में इस सम्बन्ध में कोई रुचि या चेतना नहीं है| जहाँ तक मेरी जानकारी है अमिश त्रिपाठी और सावी शर्मा ने अपने लेखन का सफ़र स्वयं-प्रकाशन से किया था| उनकी लोकप्रियता के बाद ही स्थापित प्रकाशकों ने उन्हें अनुबंधित किया था|

आंकड़ों पर आधारित अगर बात करनी हो तो 2017 में Jeff Bezos ने अपने shareholders को यह अधिकारिक सूचना दी थी कि उस वर्ष उस की कम्पनी ने 1000 से ज्यादा प्रति लेखकों को एक लाख डॉलर्स के लगभग रायल्टी का भुगतान किया थाउसी वर्ष में एक अमेरिकी निकाय ने आंकड़ा जारी किया था कि अमेरिका में प्रति वर्ष 10000 नए लेखक सामने आते हैंइन आंकड़ों की चर्चा मैंने अपनी पुस्तक, हिंदी में लिखी पुस्तक को स्वयं प्रकाशित करने की सुनहरी किताब: A Golden Kit for Self-Publish a Book Written in Hindi (EBookWriting 1) (Hindi Edition)” में सन्दर्भ के अनुरूप की भी है|

जब से स्वयं-प्रकाशन के माध्यम को अपनाया है, मैंने इस माध्यम से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने में लगा रहता हूँ| इस के लिए मैंने कुछ सम्बन्धित पुस्तकें पढ़ी हैं| इस माध्यम से जुड़े आलेख जब भी मिल जाते हैं, मैं उनका अध्ययन करने से नहीं चूकता और उन की प्रतिलिपि अपने पास संजोके रखने का प्रयत्न करता हूँ|

मेरे अब तक के अध्ययन से जिस स्तर तक का मुझे बोध मिला है वह कुछ बहुत असत्यवतविरोधात्मक और व्यंगात्मक निष्कर्ष के स्तर तक पहुंचा है| जो लेखक खुद को सफल स्वयं-प्रकाशक बता रहें हैं, लगभग सभी ने खुद को स्वयं-प्रकाशन की विधि सिखाने का कोच घोषित कर रखा है| लगभग सभी ने पुस्तकें लिख रखी हैं और कई तो अपनी पुस्तकें मुफ्त में उपलब्ध करते रहते हैं| इस को वह सफल प्रकाशक और लेखक बनने के लिए Marketing Strategy बताते हैं और उन पुस्तकों में बड़े मासूमियत भरी शैली में बताते हैं कि सफल लेखक बनना और उस पर स्वयं-प्रकाशन के माध्यम से सफल होना सम्भव नहीं है परन्तु अगर आप उन से coaching लेते हैं तो आप स्वयं-प्रकाशन के माध्यम से इसे सफल व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं| अगर आप ने उन की मुफ्त की पुस्तक Download कर के पढ़ ली तो आप को मुफ्त में subscription प्राप्त करने को कहा जाता है| आप शायद उन के newsletter को subscribe भी कर लें और ऐसा करने में कोई हर्ज़ भी नहीं है तो आप को हर दिन एक email मिलने लग जाएगा| उस में कई प्रलोभन भी होंगे और कुछ मुफ्त के सुझाव भी होंगे जिसे प्रयोग में लाना आप की विवेकशीलता पर निर्भर करता है| इसी प्रकार के एक लेखक ने यहां तक कह दिया कि आप अपने लेखन से कुछ भी न कमाए परन्तु यह आप से अवश्य कुछ कमा जाते हैं|

इस से पहले कि मैं अपनी बात को आगे लेकर चलूँ, मैं कुछ और भी स्पष्ट करना चाहता हूँ| इस लेख के प्रश्न का उत्तर जितना पाठकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा उतना ही मेरे लिए भी है| दूसरी बात यह कि मैं मूल रूप में Textbooks लेखक हूँ जब कि इस विश्लेषण और उस पर आधारित उत्तर का फल उन आकड़ों और case studies पर आधारित है जो मूल रूप में नावल्कारों से संबंधित है|

कुछ बातें मेरे अपने अनुभव और कुछ निरंतर अध्ययन से जो सामने आती हैं वह इस प्रकार संकलित करता हूँ|

पहला यह कि आप को छह महीने तक कोई खास सफलता हाथ नहीं लगेगी|

दूसरा केवल एक पुस्तक प्रकाशित करने से कोई बात नहीं बनने वाली| आप को निरंतर लिखते रहना पड़ेगा| इस बात पर आप को एक अच्छी खासी चर्चा विभिन्न पटलों पर और पुस्तकों में मिल जायेगी| अगर आप लगातार हर महीने कुछ राशी रायल्टी के रूप में प्राप्त करना चाहते हैं तो आप को लगभग 10 Titles प्रकाशित करने होंगे| एक पुस्तक का लेखक कोई लेखक नहीं होता है| जो लेखक सफल हैं वह 30 से 60 पुस्तकों के लेखक हैं| इसे आप एक साधारण से सर्वेक्षण से खुद ही पता कर सकते हैं| इस के लिए आप उन लेखकों की Amazon Ranking को देखें तो वह हमेशा ऊंची बनी रहती है और उन की पुस्तकें भी 200 से 400 के बीच में होती हैं| इस में मेरे सर्वेक्षण में Science Fiction और pornography के लेखक ज्यादा सफल दिखाई देते हैं| बेशक यह अवलोकन पश्चिमी देशों में बिक्री पर आधारित है|

तीसरी महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि आप को marketing करनी ही पड़ेगी| आप को अगर पैसे नहीं खर्च करने तो भी आप को दूसरे मुफ्त वाले तरीके अपनाते रहना पड़ेगा| एक लेखक के विचार को उठाते हुए मेरा यह कहना है कि अगर आप ने 5 से 6 titles प्रकाशित कर लिए हैं और एक साल में आप की प्रति title 10 प्रतियां भी बिक जाती हैं तो आप सफल हो| इस में आप को कोई ज्यादा कमाई तो नहीं होगी परन्तु आप को इस से यह समझना लेना चाहिए कि आप मैदान में आ गए हो|

Marketing का सब से मुफ्त तरीका है कि आप अपनी पुस्तक Kindle Select में डाल दो| वहां से कमाई कोई ज्यादा तो नहीं होती है परन्तु आप को यह जरूर पता लग जाता है कि आप की कौन सी पुस्तक पाठकों को आकर्षित कर रही है| मुझे Kindle Select की Calculation का फार्मूला आज तक समझ नहीं आया है परन्तु अपने case के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि 10 pages के पीछे 1 रुपया मिल जाता है| अगर किसी महीने आप की कोई भी पुस्तक नहीं बिकती तो Kindle Select में उस के पढ़े जाने की सम्भावना बनी रहती है|

जो चर्चाएँ विभिन्न फोरुमों पर मिलती है, उस के अनुसार जब आप अपने साल के खर्चे अपने लेखन से निकालने लग जायो तब आप सफल हो| उस के लिए आप को ऊपर दी गई बातों को अपना होगा|

मैं अभी सफल लेखकों की श्रेणी में नहीं आया हूँ
इस से आगे पढ़ने के लिए नीचे दी गई कड़िया जांचें
क्या स्वयं-प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? (भाग 2)


My observations are based on my personal experiences and the writings of the following identities.
1.  Quora. Com
2. and the Kindle Store
4. KDP Community (Only for the Members of KDP)
9. through Google syndication. ( is a paid site)
11. – a moderate newsletter sender


कुछ मुफ्त पुस्तकें जो आप Download कर सकतें हैं| 

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