Caution on Advertisements

Attention Readers:

Ongoing reading:
The Reading Continues.
In the meantime, check the new books by the blogger at
Amazon Author Page and Google Playbooks of Sumir Sharma

Sunday, February 7, 2021

क्या स्वयं प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? (भाग 2)

 इस लेख के शीर्षक परआधारित श्रृंखला में यह दूसरा प्रकरण है|

इस लेख में उन आँकड़ों पर चर्चा एवं व्याख्यान है जो पिछले एक साल में सामने आयें हैं|

अगर आप पूछें, “चुनीलाल पिछले एक साल में क्या किया और शीर्षक में लिखे प्रश्न पर अब क्या कहना है?”

तो उस की भी कथा है|

पिछले दस महीनों में मैंने एक नया काम किया| मैंने अपनी पुस्तकों का प्रकाशन Google Play Books पर किया है| अब मेरी पुस्तकें Amazon और Google Play Books पर भी उपलब्ध हैं|

 

पहले Google Play Books की कथा

28 मार्च, 2020 को मैंने अपनी पुस्तकें Google Play Books पर डालनी शुरू कीं| मेरे पास अपनी पुस्तकों का manuscript तो पहले से तैयार पड़ा था| वह पुस्तकें Amazon पर पहले से प्रकाशित थीं| इस लिए, मुझे Google Play Books पर अपनी पुस्तकों का Catalogue बनाने में ज्यादा समय नहीं लगा| इस में केवल एक बंदिश से निकलने में समय लगा| मेरी पहली लिखी हुई पुस्तकें Amazon पर पहले ही उपलब्ध थीं| मैंने सभी को Kindle Select Programme में डाल रखा था| उस से बहार निकलने में मुझे तीन महीने लग गए थे| परन्तु 2020 के नवम्बर तक मेरी 18 पुस्तकें Google Play Books पर उपलब्ध थीं| परन्तु जल्द ही मुझे उन में से कुछ पुस्तकें हटानी पड़ीं| अब केवल 14 पुस्तकें ही Google Play Books पर उपलब्ध हैं| (यह आंकड़ा 07/2021 का है जिसका प्रमाण नीचे Snapshot में दिया गया है|) इस समय तक 1877 पुस्तकें बिक चुकी है| इन पर कुल कमाई 276 रुपए हुई है जो कि मुझे प्राप्त हो चुकी है| प्रमाण के लिए नीचे दिया गया Snapshot देखें|


1877 पर केवल 276 ही?

यह 1877 की बिक्री में उन तीन Titles की बिक्री भी है जो कि मेरे Catalogue से मुफ्त में उपलब्ध है| उन में से एक Title तो खूब download हो रहा है| यह आंकड़ा पिछले 10 महीनों का है जब कि heading में इसे 12 महीनों का बताया गया है| इस की सच्चाई नीचे दिए गए snapshot से प्रमाणित होती है|



 इस बिक्री में कुछ भारत से बहार भी हुई है| प्रमाण के लिए Google Analytics का नीचे दिया गया snapshot देखें|



 जैसा कि snapshot में देखा जा सकता है कि 276 की कमाई चार देशों से हुई है| यह कमाई भारत, साउथ अफ्रीका, मलेशिया और फिलीपींस से हुई है|

मेरे लिए यह रोमांचित करने वाली बात है कि मेरे जैसा नौसिखिया भारत में बैठे-बैठे भारत से बहार भी अपने लेखन को पहुंचा रहा है| पाठकों की जो भी राय हो, मेरे लिए तो यह हर्ष की बात और एक बड़ी सफलता है| यह सब स्वयं प्रकाशन और e-publishing के माध्यम से हुया है| हाँ, यह जरूर है कि कमाई ज्यादा नहीं हो पाई है|

Amazon पर बिक्री की एक रोमांचकारी सफलता

Amazon पर Print book की एक रोमांचकारी सफलता भी प्राप्त हुई है| मेरा एक title सिंगापुर की एक लाइब्रेरी ने Amazon से खरीदा है| प्रमाण के लिए नीचे दिए गए snapshots देखें| 




Amazon पर से यह पुस्तक 2019 में ही बिक चुकी थी| मेरी एक पुस्तक amazon की जापानी site पर बिकी थी| Amazon पर मेरे खाते में कुछ रक्म येन में भी खड़ी हुई है| परन्तु उन का भुगतान तब तक नहीं होगा जब तक 1000 येन तक की बिक्री नहीं हो जाती|

Amazon और Google Play Books पर संयुक्त बिक्री की समीक्षा

स्वयं प्रकाशन से सफल होने वाले यह बताते हैं कि अगर आप की पुस्तकों की बिक्री होती रहती है और बिक्री का आंकड़ा बढ़ता रहता है तो आप सफल लेखक माने जाओगे|

Amazon और Google Play Books पर प्रकाशन के बाद मेरे संबंध में बिक्री तो बढ़ गई है परन्तु कमाई इतनी नहीं है कि इस को में सफल व्यवसाय घोषित कर सकूँ|

 Amazon और Google Play Books पर संयुक्त बिक्री करने से कुछ और भी पहलू सामने आए हैं| Amazon पर मेरी पुस्तकों की बिक्री कम हो गई है| इस के कुछ कारण भी समझ आते हैं| एक कारण यह है कि Google Play Books पर अपनी पुस्तकें उपलब्ध करने के लिए मुझे Amazon के Kindle Programme से बाहर आना पड़ा है| दूसरा, पुस्तक की कीमत निश्चित करने में Google बहुत सहजता और नरमी दिखाता है| Amazon न्यूनतम मूल्य भी बहुत ऊँचा रखता है और मुफ्त बिक्री पर नियम लागू कर रखे हैं| परन्तु February 2021 में Amazon बिक्री की एक नई योजना भी लेकर आया है| उस का प्रभाव अभी देखना रहता है|

कुल मिला कर इस प्रकार के व्यापार में अभी पैसा नहीं दिखा है| जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख में कहा था कि अगर आप अपने लेखन से अपनी रस्सोई का खर्चा निकालने लग जाओ तो यह एक सफल व्यवसाय कहा जा सकता है| मेरे साथ अभी ऐसा नहीं हो रहा है|



Catalogue of the books written by Sumir Sharma on Amazon




No comments: